करनाल की असंध नगरपालिका में हुए कुर्सी घोटाले पर करनाल नगर निगम की सिफारिश के बावजूद कार्रवाई अटकी हुई है। निगम आयुक्त ने 25 अगस्त को एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजकर पालिका अभियंता, कनिष्ठ अभियंता और सुपरवाइजर के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही की सिफारिश की थी। शिकायतकर्ता रजत लाठर की माने तो रिपोर्ट में ठेका कंपनी को डिबार्ड करने और शिकायत दर्ज करने के भी निर्देश थे।
लेकिन अब तक केवल ठेका कंपनी को बैन किया गया है, अधिकारियों और चेयरमैन पर कोई ठोस एक्शन नहीं हुआ। यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष रजत लाठर ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ डिबार्ड करना कोई समाधान नहीं है, ठेकेदार और अधिकारियों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
सार्वजनिक स्थलों पर लगवाई थी कुर्सियां
करीब तीन महीने पहले असंध नगरपालिका ने शहर के सार्वजनिक स्थलों पर 214 स्टील की कुर्सियां लगवाई थीं। लेकिन 27 जून को घोटाले की बात सामने आने के बाद इन कुर्सियों को रातों-रात उखाड़कर एक खाली प्लॉट में डंप कर दिया गया। यह मामला यूथ कांग्रेस ने जोर-शोर से उठाया और करनाल से लेकर असंध तक प्रदर्शन किए। इसके बाद नगर निगम करनाल ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर 25 अगस्त को उच्चाधिकारियों को एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजी गई। कमेटी की रिपोर्ट और सिफारिशें
नगर निगम करनाल की गठित कमेटी ने अपनी जांच में पाया कि इस पूरे मामले में नगर पालिका अभियंता (एमई) अशोक कुमार, कनिष्ठ अभियंता (जेई) उमेश कुमार और एचकेआरएनएल सुपरवाइजर अमित कुमार की भूमिका संदिग्ध है। रजत ने बताया कि रिपोर्ट में इन तीनों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई करने की सिफारिश की गई। साथ ही ठेकेदार सुनील कुमार की ठेका कंपनी को डिबार्ड करने का प्रस्ताव दिया गया। करनाल नगर निगम कार्यालय ने यादि क्रमांक 7028/DMC और 7030/DMC (दिनांक 25-08-2025) से निदेशक शहरी स्थानीय निकाय पंचकूला को पत्र भेजा। इसी तरह 7031/DMC (25-08-2025) से आयुक्त एवं सचिव हरियाणा सरकार तथा CEO, HKRNL को पत्र लिखा गया। ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई हेतु 7026/DMC (25-08-2025) के जरिए सचिव नगरपालिका असंध को लिखा गया। रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो और शिकायत दफ्तर में दर्ज की जाए। फिर भी कार्रवाई अधूरी क्यों?
यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष और शिकायतकर्ता रजत लाठर ने आरोप लगाया कि ठेका कंपनी को तो डिबार्ड कर दिया गया, लेकिन अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सिर्फ डिबार्ड करना ही कोई एक्शन नहीं है। ठेकेदार और अधिकारियों पर धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए। एमई-जेई ने कुर्सियों की जांच की, उन्हें नगरपालिका की शर्तों पर सही बताया और बिल पास करने की तैयारी कर ली। ऐसे में उनकी पूरी जिम्मेदारी बनती है, लेकिन सरकार ने उन पर कार्रवाई नहीं की। 8 हजार रुपए प्रति कुर्सी का घोटाला सामने आया
बीते दिनों शिकायतकर्ता रजत लाठर ने सोशल मीडिया पर भी चेयरपर्सन और अभियंताओं की तस्वीरें साझा कीं थी जिसमें वे कुर्सियों का वजन कर रहे थे। साथ ही क्वालिटी चेक वाला बिल भी साझा किया, जिसमें स्पष्ट लिखा था कि नगरपालिका ने विभिन्न वार्डों में स्टेनलेस स्टील की बेंच लगवाई हैं।
इस काम की अनुमानित लागत करीब 41.48 लाख रुपए थी। बिल में पहली किस्त 12.68 लाख (ग्रॉस) और 11.29 लाख (नेट) का भुगतान दिखाया गया। गुणवत्ता और मात्रा की जांच को संतोषजनक बताकर भुगतान की सिफारिश की गई। बिल पर चेयरपर्सन, एमई, जेई, सोशल पर्सन और इंजीनियर ने हस्ताक्षर किए। शर्त थी कि 50 किलो की होनी चाहिए कुर्सी
रजत ने बताया कि दरअसल, जनवरी 2024 में 214 कुर्सियों के लिए टेंडर पास हुआ था। शर्त थी कि हर कुर्सी का वजन 50 किलो होना चाहिए, लेकिन मौके पर जांच में वजन केवल 30-35 किलो पाया गया। कीमत भी बाजार भाव से कहीं ज्यादा लगाई गई। प्रति किलो 396 रुपए की दर से खरीद दिखाई गई, जबकि बाजार में भाव मात्र 225 रुपए प्रति किलो था। इस तरह प्रति कुर्सी लगभग 8 हजार रुपए और कुल 214 कुर्सियों में 17 लाख रुपए से अधिक का घोटाला सामने आया। चेयरपर्सन पर भी उठे सवाल
यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष रजत लाठर ने बीजेपी की चेयरमैन सुनीता रानी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चेयरपर्सन ने बिना जांच किए कुर्सियों के बिल को पास करने के लिए हस्ताक्षर किए। यह जनता की मेहनत का पैसा है, इसलिए चेयरमैन की भी जिम्मेदारी बनती है। सोशल मीडिया पर लगाए आरोपों पर चेयरमैन सुनीता अरड़ाना ने सफाई देते हुए कहा कि मुझे तकनीकी जानकारी नहीं थी। मैं नई-नई चेयरमैन बनी थी। जहां तक फोटो की बात है, मैं वहां से गुजर रही थी और जेई-एमई ने मुझे रुकवाया। मैं थोड़ी देर खड़ी हुई और चली गई। मुझे नहीं पता था कि फोटो ली जा रही है। कुर्सियां लगने के बाद हटाई भी गईं
शिकायतकर्ता ने बताया कि 5 जून 2025 को कुर्सियां वार्डों में लगाई गई थीं। लेकिन जैसे ही 27 जून को मामला सुर्खियों में आया, तो रातों-रात सभी कुर्सियों को हटाकर एक खाली प्लॉट में डाल दिया गया। सवाल यह उठता है कि अगर सब कुछ नियमों के अनुसार था, तो कुर्सियां क्यों हटवाई गईं? और अगर गड़बड़ी थी तो फिर केवल ठेका कंपनी को डिबार्ड करके खानापूर्ति क्यों की गई? सरकार की मंशा पर सवाल
रजत लाठर ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार मुक्त होने की बात करती है, लेकिन हकीकत यह है कि एक्शन रिपोर्ट को एक महीना बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यूथ कांग्रेस भ्रष्टाचारियों को बचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी और अगले दो दिनों में असंध में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
करनाल कुर्सी घोटाले का मामला:एक्शन रिपोर्ट के बाद भी अटकी कार्रवाई, कांग्रेस ने दी चेतावनी दो दिन बाद होगा बड़ा प्रदर्शन
9