भास्कर न्यूज | अमृतसर अवर्डा कंपनी के काम छोड़कर जाने से 13 दिन पहले ही शहर में कूड़े का संकट गहरा गया है। प्राइवेट सफाई कर्मियों ने करीब 2 माह का वेतन न मिलने पर कूड़ा लिफ्टिंग का काम रोक दिया है। डोर-टू-डोर कूड़ा लिफ्टिंग का काम ठप्प हो गया है। वहीं निगम के पास अपनी कोई छोटी गाड़ियां नहीं है, जिससे डोर-टू-डोर कूड़ा उठवाया जा सके। हालांकि अपनी 57 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां है जिसमें हेल्थ विभाग के पास 47 तो ओएंडएम की 10 शामिल हैं। जिनके भरोसे कूड़ा उठाया जाएगा। बता दें कि शहर से रोज करीब 630 टन कूड़ा निकलता है जिसको उठा पाना निगम के लिए आसान नहीं है। छोटी वाली गाड़ी तो एक भी नहीं हैं ऐसे में रिक्शे वाली ट्रॉलियों को लगाया गया है जो लोगों के घरों में जाकर कूड़ा उठा रहे हैं। बीते सोमवार को अवर्डा के प्राइवेट मुलाजिमों ने 2 माह से वेतन रुकने व डीजल-पेट्रोल-सीएनजी उधार मिलना बंद होने पर काम ठप्प कर निगम व डीसी दफ्तर के बाहर विरोध जताया था। अवर्डा के प्राइवेट मुलाजिमों ने बीते दिनों कामकाज ठप्प तो कर दिया था लेकिन कुछ खुद ही बैकफुट पर आ गए। 25 गाड़ियां डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए निकलीं। दरअसल, कंपनी के प्राइवेट कर्मी होने के कारण निगम अफसरों का जोर इन पर नहीं चल पाएगा कि ये काम करें या नहीं। ऐसे में अब वैकल्पिक व्यवस्था निगम के अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ही बचे हैं। बता दें कि अवर्डा की करीब 110 छोटी गाड़ियां शहर में चल रही थी। इसके अलावा 85 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां थी जिससे उतनी मुश्किलें नहीं आईं। हालांकि छोटी गाड़ियां बंद होने के बाद लोगों के घरों से कूड़ा नहीं उठाया गया तो हंगामा बढ़ने लगा है। दरअसल, प्राइवेट सफाई मुलाजिमों ने देखा कि कई घरों में रिक्शा वाली ट्रॉलियां कूड़ा उठाने पहुंचने लगी हैं तो इसका विरोध जताया। कुछ जगहों पर आपस में बहस भी हुई। रिक्शा वालों ने कहा कि निगम अफसरों ने बोला है। जिस पर मुलाजिमों ने कहा कि यह उनसे जुड़ा मामला है। इसलिए बीच में न आएं। अवर्डा कंपनी के प्राइवेट सफाई मुलाजिम जसपाल सिंह ने बताया कि काम पर लौट आएंगे। छोटी गाड़ियां लोगों के घर पर कूड़ा उठाने जाएंगी। लेकिन मुलाजिमों की मुश्किलें सुनने वाला कोई नहीं है। मेयर जतिंदर मोती भाटिया ने कहा कि नगर निगम के पास जो भी संसाधन हैं, पूरी क्षमता के साथ डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करवाया जा रहा है। हेल्थ विभाग की पूरी टीम इसी काम में लगा दी गई है। एडिश्नल कमिश्नर सुरिंदर सिंह के साथ खास मीटिंग का प्लान भी तैयार किया गया है। रिक्शा वाली ट्रॉलियां लोगों के घरों से कूड़ा उठाएंगी। शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का वर्क ऑर्डर नई कंपनी को जल्द हो सके इस बारे उच्च अफसरों से भी बात करेंगे। अवर्डा कंपनी के काम ठप्प करने से अचानक ही यह हालात बने हैं, जबकि 22 अक्टूबर तक काम बंद करने का नोटिस दिया गया था। बता दें कि इस समय शहर से रोजाना करीब 630 टन कूड़ा जनरेट होता है अगर कूड़े की लिफ्टिंग बंद होती है तो शहर ही कूड़े का डंप बन जाएगा। डोर-टू-डोर लिफ्टिंग न होने से लोग सड़कों पर कूड़ा फैंकने लगे हैं।
अवर्डा के काम छोड़ने से 13 दिन पहले ही कूड़े का संकट निगम के पास डोर-टू-डोर लिफ्टिंग को छोटी गाड़ियां नहीं
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