कुरुक्षेत्र में मारकंडा से खतरा बरकरार:डेंजर लेवल से 0.15 मीटर ऊपर बह रही; एक दिन-रात में 6 हजार क्यूसेक पानी कम

by Carbonmedia
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कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में मारकंडा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन हालात अब भी गंभीर हैं। नदी अभी भी खतरे के निशान 256 मीटर से 0.15 मीटर ऊपर बह रही है। सुबह करीब साढ़े 5 बजे मारकंडा में 30 हजार 445 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। रात तक पानी और कम होने के आसार हैं। गेज रीडर रविंद्र के मुताबिक, मारकंडा नदी से 5 से 6 सितंबर सुबह 5 बजे तक 6 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी कम हुआ है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर, नाहन और काला अंब में बारिश नहीं हुई तो मारकंडा का पानी धीरे-धीरे कम होने लगेगा। बीती रात 10 बजे तक नदी में 32 हजार 841 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था। करीब 8 घंटे में 2400 क्यूसेक पानी कम हुआ है। पानी से खेत बने दलदल पिछले 4 दिन से खेत में मारकंडा का पानी खड़ा रहने से खेत दलदल बन चुके हैं। अभी 2 दिन में पानी कम होने के आसार है। जिला कुरुक्षेत्र में 22 हजार एकड़ से ज्यादा में फसलें प्रभावित हुई हैं। इनमें 5 हजार से ज्यादा एकड़ में फसलें पूरी तरह से डूब चुकी है। इस वजह ये फसलें पूरी तरह से खराब हो चुकी है। अंबाला के गांवों तक पहुंचा पानी सबसे बड़ी चिंता इस्माइलाबाद के नैसी गांव के टूटे तटबंध की है। यहां 2 जगह से तटबंध पहले ही क्षतिग्रस्त था, जिसे रिपेयर नहीं किया जा सका। 4 सितंबर की रात को तीसरी जगह से टूटे तटबंध से निकला पानी अंबाला के गांवों तक पहुंच गया है। मारकंडा का बहाव कम होने पर गांव के लोग तटबंध को रिपेयर करने की कोशिश करेंगे। 245 को रेस्क्यू किया उधर, पानी से घिरे गांवों में राहत-बचाव का काम जारी है। प्रशासन ने 5 गांवों से 245 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। उनको मंदिर और धर्मशालाओं में शरण दिलाई है। प्रशासन की ओर से उनको खाना और अन्य सुविधाएं दी जा रही है। वहीं प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमें गश्त कर रही है, ताकि किसी तरह की बीमारी फैलने से रोकी जा सके। साथ लोगों तक दवाइयां पहुंचाई जा सके। झील में नदी और नहर का पानी बीबीपुर झील में जलबेहड़ा से मारकंडा नदी का ओवरफ्लो पानी दीवार से होकर आ रहा है, जबकि ज्योतिसर हेड से नरवाना ब्रांच नहर (भाखड़ा) का पानी छोड़ा जा रहा है। यहां किसान पहरा लगाकर बैठे हैं ताकि सीमित पानी ही जाए। इससे झील में निचले लेवल वाले 2 हजार एकड़ के करीब खेतों में खड़ी फसल डूबी चुकी है, जबकि 3500 एकड़ पर खतरा मंडरा रहा है।

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