चंडीगढ़ जीएमसीएच-32 के टेली-मानस सेल पर 900 कॉल आईं, जिनमें से 99 कॉल आत्महत्या रोकथाम से जुड़ी थीं। पीजीआई मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. शुभो चक्रवर्ती ने बताया कि पहल का मकसद लोगों को यह भरोसा दिलाना है आत्महत्या करने की सोच आने और उस पर कदम उठाने के बीच बहुत ही कम समय का अंतर होता है। इसमें 5 मॉड्यूल शामिल हैं, जिनमें काउंसलर्स को सहानुभूति, संवेदनशीलता और बिना जज किए कॉलर की बात सुनने की ट्रेनिंग दी जाती है। जरूरत पड़ने पर कॉलर को मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से जोड़ा जाता है और मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में रेफर किया जाता है। 20 भाषाओं में मिलती है मदद पीजीआई साइकेट्री विभाग के डॉ. राहुल चक्रवर्ती के अनुसार, टेली-मानस पर कॉल करने वाले को 20 भाषाओं में रिस्पॉन्स मिलता है, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, तमिल और असमी शामिल हैं। कॉलर्स को आश्वस्त किया जाता है, उनकी परेशानी सुनी जाती है और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से जोड़ा जाता है। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों में झिझक है। खासतौर पर छात्र प्रेशर, एग्जाम की चिंता और निराशा के कारण मानसिक दबाव झेल रहे हैं। ऐसे में टेली-मानस उन्हें सुरक्षित मंच प्रदान करता है, जहां वे खुलकर अपनी परेशानी साझा कर पाते हैं। कई बार लोग यह तक नहीं जानते कि वे मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं। 2016-17 के एक सर्वे के मुताबिक देश में मानसिक रोगों के इलाज का अंतर 70 से 90 प्रतिशत तक है। यानी ज्यादातर लोग इलाज नहीं करवा पाते। कोविड के बाद यह समस्या और बढ़ी है।
चंडीगढ़ GMCH-32 एक साल में आत्महत्या की 99 कॉल:कुल कॉल आई 900, पीजीआई कर रहा जीएमसीएच समेत कई अस्पतालों की मेंटरिंग
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