पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के ठेका कर्मचारियों की हड़ताल का असर वीरवार को लुधियाना में बड़े पैमाने पर देखने को मिला। हड़ताल के कारण शहर से चलने वाली करीब 235 सरकारी बसें पूरे दिन सड़कों से नदारद रहीं। इससे करीब 80 रूटों पर सेवाएं ठप हो गईं, जिसमें कटरा, जयपुर, अंबाला, मनाली, मणिकरण और चिंतपूर्णी जैसे प्रमुख इंटरस्टेट रूटों के साथ-साथ माछीवाड़ा, सुल्तानपुर, नकोदर और शाहकोट जैसे ग्रामीण मार्ग भी शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आज भी सरकारी बसों का चक्का जाम रहेगा। बस अड्डे पर सुबह से ही यात्री इकट्ठा होते रहे, लेकिन सरकारी बसें न चलने के कारण उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। कई लोगों को हड़ताल की जानकारी बस अड्डे पहुंचने के बाद हुई। निजी बस ऑपरेटरों ने मौके का फायदा उठाकर किराए में बढ़ोतरी कर दी, जिससे यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। मुफ्त यात्रा योजना का लाभ लेने वाली महिलाएं सबसे अधिक परेशान दिखीं। जालंधर जाने वाली 59 वर्षीय गुरबक्श कौर ने कहा कि सुबह से इंतजार कर रही हूं, दो घंटे से ज्यादा हो गए। अब मजबूरी में निजी बस से ही जाना पड़ेगा। कई ने सफर रद्द किया, कुछ महंगा किराया देकर गए इसी तरह, जगराओं जाने वाली 19 वर्षीय कॉलेज छात्रा सोनम ने बताया कि उन्हें हड़ताल की जानकारी नहीं थी। मैं सरकारी बस में आधार कार्ड दिखाकर सफर करती हूं, इसलिए ज्यादा पैसे साथ नहीं रखे। अब समझ नहीं आ रहा किराया कैसे दूंगी। इस तरह के हालात के चलते कई यात्रियों को अपने कार्यक्रम रद्द करने पड़े, तो कुछ लोग निजी वाहनों में ऊंचा किराया देकर यात्रा करने को मजबूर हुए। हड़ताल के चलते इंटरस्टेट रूटों पर जाने वाली बसें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे त्योहारों और शादी-ब्याह जैसे खास मौकों पर यात्रा करने वालों को भारी दिक्कत हुई। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना सरकारी बसों पर निर्भर लोगों के सामने आवाजाही का संकट खड़ा हो गया। माछीवाड़ा और सुल्तानपुर लोधी के यात्रियों ने बताया कि निजी बसें या तो उनके गांव तक नहीं जातीं या फिर किराया दोगुना वसूल रही हैं। {हड़ताल लंबी खिंच सकती: ठेका कर्मचारियों का कहना है कि सरकार किलोमीटर स्कीम के तहत नई बसें निजी कंपनियों को देने के लिए टेंडर जारी कर रही है, जिससे सरकारी परिवहन का निजीकरण होगा और स्थायी नौकरियों पर खतरा आएगा। इसके अलावा, समय पर वेतन न मिलना, अनुबंध पर भर्ती खत्म करना और नौकरी पक्की करने की मांगें भी लंबे समय से लंबित हैं। अगर आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारियों के बीच समझौता नहीं हुआ, तो हड़ताल लंबी खिंच सकती है।
सरकारी बसों के चक्का जाम से 80 रूट ठप, आज भी हड़ताल जारी रहेगी
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