अबू धाबी की ड्राइवरलेस टैक्सियों में क्या है खास, किन देशों के पास हैं बिना ड्राइवर के चलने वाली गाड़ी

by Carbonmedia
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Driverless Taxi: तकनीक जिस तेजी से बदल रही है उसने हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को पूरी तरह बदल कर रख दिया है. अबू धाबी इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां बिना ड्राइवर वाली टैक्सियां सड़कों पर उतर चुकी हैं. ड्राइवरलेस टैक्सी न सिर्फ भविष्य की झलक देती हैं बल्कि ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी नए स्तर पर ले जाने का वादा करती हैं.
अबू धाबी की ड्राइवरलेस टैक्सी की खासियतें
अबू धाबी ने इन टैक्सियों को हाई-टेक सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस किया है. इन गाड़ियों में कैमरे, राडार और लेज़र तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिससे यह चारों ओर के ट्रैफिक और पैदल चलने वालों की हर गतिविधि को रियल-टाइम में पकड़ लेती हैं. खास बात यह है कि यात्रियों को किसी इंसानी ड्राइवर पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
बेहतर डिजाइन और स्मार्ट तकनीक
इन गाड़ियों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह न केवल सिग्नल और ट्रैफिक रूल्स को खुद समझती हैं बल्कि आपात स्थिति में तुरंत निर्णय भी ले सकती हैं. उदाहरण के लिए, सड़क पर अचानक कोई वाहन या पैदल यात्री आ जाए तो यह टैक्सी तुरंत स्पीड कम कर देती है या ब्रेक लगा देती है. इससे दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है. यात्रियों के लिए इन टैक्सियों का अनुभव बिल्कुल अलग है. इसमें बैठने के बाद आप ऐप के जरिए गंतव्य चुनते हैं और टैक्सी अपने आप रास्ता तय करके वहां पहुंचा देती है. पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा और प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाता है.
किन देशों में चल रही हैं ड्राइवरलेस गाड़ियां?
ड्राइवरलेस गाड़ियां सिर्फ अबू धाबी तक सीमित नहीं हैं. दुनिया के कई बड़े देश इस तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं. अमेरिका में गूगल की सहायक कंपनी Waymo और टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक पहले से ही चर्चा में है. कैलिफोर्निया और एरिज़ोना जैसे राज्यों में ड्राइवरलेस टैक्सियों की ट्रायल सर्विस शुरू हो चुकी है.
चीन भी इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है. Baidu और Pony.ai जैसी कंपनियां बीजिंग और शंघाई की सड़कों पर अपनी स्वचालित टैक्सियों का परीक्षण कर रही हैं. जापान और दक्षिण कोरिया जैसे तकनीकी रूप से मजबूत देशों में भी ड्राइवरलेस कारों पर बड़े पैमाने पर रिसर्च और ट्रायल हो रहे हैं. वहीं, यूरोप के देशों में जर्मनी और फ्रांस इस तकनीक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
भविष्य में होगा फायदा
ड्राइवरलेस टैक्सी सिर्फ सुविधा का साधन नहीं, बल्कि पर्यावरण और सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम हैं. इससे ईंधन की खपत कम होगी, ट्रैफिक जाम पर काबू पाया जा सकेगा और दुर्घटनाएं भी घटेंगी. अबू धाबी की यह पहल दिखाती है कि आने वाला समय पूरी तरह ऑटोमेटेड ट्रांसपोर्ट का हो सकता है. जिस तरह मोबाइल फोन ने हमारी दुनिया बदल दी, उसी तरह ड्राइवरलेस गाड़ियां भी आने वाले वर्षों में यात्रा का चेहरा पूरी तरह बदल देंगी.
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