देशभर के लाखों छात्रों के लिए मेडिकल में दाखिले का सबसे बड़ा जरिया NEET-UG 2025 इस बार 4 मई को शांतिपूर्वक संपन्न हुआ. शिक्षा मंत्रालय और राज्य प्रशासन की संयुक्त निगरानी में परीक्षा तो सुरक्षित रही, लेकिन परीक्षा के बाद जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है.दरअसल, कई छात्रों ने पेपर की छपाई में गड़बड़ी और सवालों के क्रम में उलझन की शिकायत की है. खासकर राजस्थान के सीकर और गुजरात के जामनगर से ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां छात्रों को गलत क्रम वाले प्रश्न पत्र थमाए गए. उदाहरण के तौर पर पेपर कोड 47 वाले छात्रों ने बताया कि उनके पेपर में सवाल 7 के बाद सीधा सवाल 15 आ गया. इसी तरह गुजराती माध्यम के कोड 48 वाले छात्रों को भी जंबल पेज वाली बुकलेट दी गईं.इस गड़बड़ी के कारण कई छात्रों ने गलत सवालों के जवाब वाले गोले भर दिए या फिर बेशकीमती समय ये समझने में गंवा दिया कि आखिर सही जवाब किस सवाल के लिए भरें. परीक्षा के दौरान जब छात्रों ने सेंटर स्टाफ से इस बारे में शिकायत की, तो उन्हें जवाब मिला “पेपर जैसा है, वैसा ही हल करो.” यह सुनकर छात्रों की परेशानी और बढ़ गई.परीक्षा के बाद, अभिभावकों ने NTA और गुजरात सरकार को शिकायतें भेजीं, जिनके साथ गलत प्रश्नपत्रों की स्कैन कॉपियां भी अटैच की गईं. एक अभिभावक ने लिखा बच्चों ने परीक्षा के बीच ही गड़बड़ी बताई थी, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की. गुजरात के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि उन्हें ऐसी शिकायतें मिली हैं. वहीं दूसरी ओर, कोचिंग एक्सपर्ट्स और छात्रों ने यह भी कहा कि कुछ सवाल मेडिकल के सिलेबस से बाहर के थे. खासकर कोड 47 के सवाल नंबर 38 को लेकर विवाद है, जिसमें कैलकुलस आधारित गणितीय डेरिवेटिव पूछा गया, जो कि आमतौर पर JEE (Main) जैसे इंजीनियरिंग एग्जाम में आता है, न कि मेडिकल में.NTA ने कही ये बातहालांकि NTA की तरफ से बयान आया है कि सभी सवाल निर्धारित सिलेबस के तहत ही पूछे गए हैं. उत्तर कुंजी जारी की जा चुकी है और आपत्तियां भी मंगाई गई हैं, जिन्हें विषय विशेषज्ञों की समिति देखेगी. लेकिन इस बयान से उन छात्रों की परेशानी दूर नहीं होती जो गलत छपाई और पन्नों के उलझे क्रम से प्रभावित हुए हैं. यह कंटेंट की नहीं, बल्कि पेपर लेआउट की तकनीकी गलती है.समाधान की मांगअब छात्र और अभिभावक NTA से स्पष्ट और जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं, क्योंकि परीक्षा का रिजल्ट इसी महीने आने वाला है. 20 लाख से ज्यादा छात्र इस परीक्षा के जरिए MBBS, BDS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने का सपना देख रहे हैं, और ऐसे में पेपर की गड़बड़ी उनके भविष्य पर सीधा असर डाल सकती है.
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