Russia Offered T-14 Armata Tank: रूस ने भारत को दिया अपने विध्वंसक T-14 आर्मटा टैंक का ऑफर, कहा- वहीं बनाओ, जानें ताकत

by Carbonmedia
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भारत और रूस का डिफेंस सहयोग दशकों पुराना है. सोवियत काल से ही भारत ने रूस से फाइटर जेट, मिसाइल और टैंक खरीदे हैं. टी-90 भीष्म इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसे भारत ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ देश में ही बनाया. अब रूस ने भारत को अपना सबसे एडवांस टैंक T-14 आर्मटा की पेशकश की है.
इस डील की खास बात यह है कि रूस ने केवल सप्लाई का प्रस्ताव नहीं रखा, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भारत में ही प्रोडक्शन की पेशकश की है. यह मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को नई ऊंचाई दे सकता है.
T-14 आर्मटा टैंक नेक्स्ट जेनरेशन वार मशीनT-14 आर्मटा को रूस का सबसे एडवांस्ड टैंक माना जाता है. इसमें स्टील्थ डिजाइन, मानवरहित ऑपरेशन और 125mm 2A82-1M स्मूथबोर गन जैसी खूबियां शामिल हैं. इसमें 1500 HP इंजन है, जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों और रेगिस्तान दोनों में कारगर है. टैंक में गाइडेड मिसाइल लगी है जो 8 किलोमीटर तक सटीक वार कर सकती है. इसमें डिजिटल बैटल मैनेजमेंट सिस्टम और नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर क्षमता भी शामिल है. सैनिकों की सुरक्षा के लिए इसका क्रू कैप्सूल आर्मर से घिरा हुआ है. रूस का दावा है कि यह टैंक भविष्य के युद्धक्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.
भारत के लिए T-14 का संभावित भारतीय वर्जनरिपोर्ट्स के अनुसार, भारत को मिलने वाला T-14 आर्मटा पूरी तरह से कस्टमाइज्ड होगा. इसमें रूस का इंजन नहीं बल्कि भारत में बना डेट्रान-1500 HP इंजन लगाया जाएगा. इससे ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन और आसान होगा. इसके अलावा, उत्पादन भारत में होने से एक यूनिट की कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये तक कम हो सकती है. फिलहाल अनुमानित लागत 30-42 करोड़ रुपये प्रति यूनिट बताई जा रही है. अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो भारत को केवल आधुनिक टैंक ही नहीं मिलेंगे बल्कि भविष्य में टैंक प्रोडक्शन में आत्मनिर्भरता भी मिलेगी.
हालांकि T-14 आर्मटा को लेकर कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं. इसका प्रोडक्शन कॉस्ट बहुत ज्यादा है. पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का असर देखने को मिल सकता है. इंजन और प्रपल्शन सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें सामने आ सकती है. यही वजह है कि रूस ने अभी तक बहुत बड़ी संख्या में इन टैंकों का उत्पादन नहीं किया है. भारत को यह तय करना होगा कि क्या इस जोखिम के बावजूद उसे रूस का प्रस्ताव स्वीकार करना चाहिए, या किसी और देश के विकल्पों पर विचार करना चाहिए.
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