पैरों में दर्द, सूजन या सुन्नता को अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. लेकिन ये शरीर के अंदर चल रहे बड़े बदलाव का संकेत हो सकते हैं. वैक्सकुलर डिजीज के दाैरान ये समस्याएं देखने को मिल सकती हैं. लोग इनको खतरनाक नहीं मानते, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ये साइलेंट किलर होती हैं. इनको इग्नोर करने से जान पर भी बन आ सकती है. ऐसे में किस तरह नजर आते हैं ये लक्षण और कब सतर्क हो जाना चाहिए, आइए जानते हैं…
वैस्कुलर डिजीज के दाैरान ये हो सकती हैं समस्याएं
एन्यूरिज्म: एन्यूरिज्म तब होता है, जब ब्लड वेसल्स में सूजन आ जाती हैं. इस स्थिति में ये फट भी सकती हैं. ये समस्या आमताैर पर छाती या पेट की आर्टरीज में देखने को मिलती है. लेकिन ये शरीर के अन्य हिस्सों में भी हो सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इसका सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते. अगर ब्लड वेलल्स फट जाए तो स्थिति खतरनाक हो सकती है. ऐसे में इस समस्या को जल्द डायग्नोज कर ट्रीटमेंट जरूरी होता है.
आर्टरीज ब्लाॅक: कोलेस्ट्राॅल या क्लाॅट के कारण आर्टरीज ब्लाॅक हो जाती हैं. इससे स्ट्रोक, गैंग्रीन या अंग हानि का रिस्क हो सकता है. हेल्थ एक्टसपर्ट्स की मानें तो समय रहते इसका पता चल जाए, तो आर्टरीज ब्लाॅक की समस्याओं को दवा से ठीक किया जा सकता है.
डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी): डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी डीवीटी की समस्या में अक्सर शरीर की डीप वेन में क्लाॅट देखने को मिलता है. ऐसे केस में पैरों में बना क्लाॅट लंग्स तक पहुंच सकता है. इससे खतरनाक पल्मोनरी एंबोलिज्म की स्थिति बन सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो अक्सर लोग लोग अचानक पैर में सूजन या बिना किसी कारण के दर्द जैसे लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं. लेकिन अगर इसका इलाज न किया जाए तो डीवीटी की स्थिति खतरनाक हो सकती है.
वेनस अल्सर: पैरों या टखनों पर घाव अक्सर खराब वेन फंक्शन के चलते होते हैं. इनकी प्राॅपर देखभाल की जरूरत होती है. ये ठीक होने में समय लेते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इन्हें अनदेखा करने से गंभीर संक्रमण के साथ अन्य दिक्कतें हो सकती हैं.
वैरिकाज नसें: अचानक से शरीर में कोई नस उभरी हुई दिखने लगे. ऐसा लगे सूजन है तो ये वैरिकाज की स्थिति हो सकती है. वैरिकाज नसें सूजी हुई, मुड़ी हुई नसें होती हैं, जो दर्द व बेचैनी और यहा तक कि अल्सर का कारण बन सकती हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो बहुत से लोग घरेलू उपचार आजमाते हैं या वैरिकाज नसों को अनदेखा करते हैं. लेकिन अगर ये दर्द या सूजन का कारण बनते हैं तो वैस्कुलर एक्सपर्ट्स से सलाह लेना उचित होता है.
डायलिसिस एक्सेस: बाॅडी में किडनी फंक्शन प्रभावित होने पर डायलिसिस की जरूरत पड़ती है. इसके लिए वैस्कुलर सर्जन ही डायलिसिस एक्सेस रूट तैयार करते हैं. जिससे जटिलताओं या संक्रमण से बचा जा सके.
कब सतर्क होने की जरूरत?
पैरों, बांहों या पेट में लगातार दर्द बने रहना
पैरों पर घाव, जो ठीक होने में काफी वक्त लेते हैं
पैरों में सूजन, खासकर शाम के समय
स्किन का रंग बदलना
सुन्नता या कमजोरी
सूजी हुईं और मुड़ी हुईं नसें
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.