स्त्री-द्वेषी कारणों से मारी गई महिलाओं की हत्या को अब स्त्री-हत्या की श्रेणी में रखा जाएगा। प्रचारकों का कहना है कि व्यापक सांस्कृतिक बदलाव की अभी भी आवश्यकता है।