सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व इस बात से चिंतित है कि मांगों, प्रतिवादों और दबाव की रणनीति के खुले प्रसारण ने कर्नाटक सरकार और कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाया है।